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       लिये अटल विश्वास

 

नइया जो डगमग चली, लिए अटल विश्वास
सतत निरन्तर चाल से, होगी मंजिल पास
होगी मंजिल पास, यही है श्रम की माया
समझ समय का मोल, जिन्होंने कदम बढाया
मिले सभी का साथ, बहन हो या फिर भइया
लेकर नव विश्वास, चली जो डगमग नइया

मतदाता के रूप में, पाए अवसर आप
मुखिया उनको चुन रहे, जो छोड़े निज छाप
जो छोड़े निज छाप, सामने उसको लाना
होगा वही भविष्य, जिसे सबको है पाना
बढ़े देश का मान, बने वह विश्व विधाता
लोकतंत्र की नींव, सुदृढ़ रखता मतदाता

ऋता शेखर
१ फरवरी २०२६

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