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       तीन कुंडलिया

 


शिव–पार्वती

पार्वती की भक्ति ने, पाया शिव का सार
मिलकर दोनों साथ में, रचते हैं संसार
रचते हैं संसार, शक्ति जब शिव संग आती
जीवन का हर पंथ, संतुलित है कर जाती
जब जब साधन बनी प्रेम का दिव्य आरती
घर-घर आशीर्वाद, बसें जहाँ शिव-पार्वती


“कृष्ण–राधा”
राधा की हर साँस में बसते हैं घनश्याम
अमर प्रेम की वंदना करता हैं नंदगाम
करता हैं नंदगाम वही सुख जग में बरसे
मधुर मधुर आनंद प्रेम में हर घर हरसे
भक्ति-भाव में डूब जिसे राधा ने साधा
वही जप रहा नाम हर समय राधा राधा


“खुशी”
थोड़ी-सी मुस्कान में, भरा अमित है मोद
दुख के बोझे हर रहे, कसरत और विनोद
कसरत और विनोद, हृदय हल्का कर देते
थके हुए तन-मन में, नयी उमंगें भरते
तन-मन सेहतमंद, खुशी दौड़े घोड़ी-सी
खिलती रहे सदैव, हँसी थोड़ी थोड़ी-सी

- मोहिनी चोरड़िया
१ फरवरी २०२६

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