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तीन कुंडलिया |
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१
सीना अपना तान के, लड़े जंग में वीर
एक इंच दे नहि जमीं, बनके अर्जुन तीर
बनके अर्जुन तीर, शत्रु को पल में मारे
पलभर में दें चीर, शत्रु रण में है हारे
कहती 'मंजू' सत्य, देश के वास्ते जीना
तब ही चौड़ा होय, वायु वीरों का सीना
२
आजादी का है मना, देश में अमृत पर्व
भारतवासी हैं करे, जाँबाजों पर गर्व
जाँबाजों पर गर्व, करे भारत का झंडा
होता उनको दर्प, बाँध के वादा गंडा
कहती ' मंजू ' सत्य, देश की है आबादी
रखना इसे सँभाल, हमें प्यारी आजादी
३
भारत दो सौ साल तक, जग में रहा गुलाम
सहते थे वे यातना, न था चैन - आराम
न था चैन -आराम, सहा संकट अति भारी
किया खूब संग्राम, सुबह आयी हितकारी
गूँजा जय का नाद, गुने बलिदान इबारत
रहे मनुज आजाद, सदा है प्यारा भारत
- मंजु गुप्ता
१ फरवरी २०२६ |
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