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       चाणक की वाणी कहे

 


चाणक की वाणी कहे, अति का मत दो मान
मान एक दिन जाएगा, तुम्हें गिरा कर जान
तुम्हें गिरा कर जान, स्वयं उत्तम बन भागे
मिथ्या प्यार दिखाय, आपदा में भी ठागे
मधु मन की सुन बात, प्यार होता जो भ्रामक
दे दल दल फसवाय, चेता रहे सुधि चाणक


राजनीति के खेल में, मची देश में होड़
दल बदलू का मंत्र ही, हर विपदा का तोड़
हर विपदा का तोड़, हाथ भर लड्डू देता
जनता बहरी जान, शोर करते हैं नेता
मधु नेता जब गीत, सुनाए राष्ट्र प्रीति के
लोकशाही कर काज, सुधारे राजनीति के

- मधु श्री
१ फरवरी २०२६

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