 |
कुंडलिया दिवस |
|
|
|
१
कुंडलिया
दिवस
कुण्डलिया रच कर करूँ, प्रकट हृदय के भाव
अबकी 'कुण्डलिया दिवस', लिखूँ छन्द यह चाव॥
लिखूँ छन्द यह चाव, भावना मन में जागी
मोबाइल पर आज, लेखनी सरपट भागी॥
मन में उठी उमंग, भरी शब्दों की डलिया
श्रद्धा के फिर संग, रची मैंने कुण्डलिया॥
- कुन्तल श्रीवास्तव
१ फरवरी २०२६ |
|
|
|
|