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       तीन कुंडलिया

 


भवानी
रहो भवानी साथ में, करो शत्रु का नाश
अमन चैन हो देश में, भाईचारा काश
भाईचारा काश, जगत में फिर आ जाए
है गंदी जो सोच, शुभ्रता उसमें आए
कहे 'कीर्ति' ये सत्य, देश में रहे रवानी
आ जाओ अब मातृ, साथ में रहो भवानी


विश्वास
बनो सहारा स्वयं का, मन में रख उल्लास
जब उपजे विश्वास तो, बन जाओगे खास
बन जाओगे खास, सदा मन निर्मल रखना
पा जाओगे जीत, स्वाद तुम उसका चखना
कहे 'कीर्ति' ये सत्य, जपेंगे नाम तुम्हारा
करो नीतिगत बात, स्वयं का बनो सहारा


ईश सहारा
एक सहारा ईश का, रखें सदा ही थाम
चाहें आएँ मुश्किलें, बनते रहते काम
बनते रहते काम, राह से संकट हटते
करें सभी ही मान, पुष्प राहों में पटते
कहे 'कीर्ति'कर जोड़, मिटाते तम की कारा
होता जीवन धन्य, रहे बस एक सहारा

- कामिनी श्रीवास्तव 'कीर्ति'
१ फरवरी २०२६

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