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       तीन कुंडलिया

 


सर्दी के दिन
सर्दी के दिन आ गए, लगे ठिठुरने हाथ
तभी मिले कुछ चैन जब, मिले आग का साथ
मिले आग का साथ, रात तब बीते सुख से
जैसे बच के आय, कोई मृत्यु के मुख से
छोड़ो स्वेटर शॉल और जलवा लो गुरसी
इसी भरोसे कटे चार महिने की सर्दी


कसरत
कसरत से इस देह को मिले उचित आकार
कुंदन सी चमके अगर, उत्तम हो आहार
उत्तम हो आहार, जिओ अनुशासित जीवन
रहे स्वच्छ परिवेश, रखो निर्मल ये तन-मन
छोड़ अहं का भाव, सदा परमारथ में रत
ध्यान ईश से जोड़, आत्मिक कर लें कसरत


प्रेम
जीवन में यदि प्रेम है, सब कुछ है फिर पास
ये है कुदरत का दिया, सर्वश्रेष्ठ एहसास
सर्वश्रेष्ठ एहसास, खुशी फैलाये जग में
मन में भरे उमंग, जोश भर दे रग रग में
फिरे प्रेम में मगन, बावरा हो कर के मन
वही मनुज है श्रेष्ठ, सफल है उसका जीवन

- अमित खरे
१ फरवरी २०२६

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