अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

ज्योति पर्व
संकलन

एक दीप तुम्हारा भी है

 

मेरी पूजा की थाली में
एक दीप तुम्हारा भी है

खुशियों की वर्षा तुमको
गद-गद कर दे
प्रीत की फुलझड़ियाँ तुमको
जगमग कर दें

गीतों की इस स्वरमाला में
एक गीत तुम्हारा भी है
मेरी पूजा की थाली में
एक दीप तुम्हारा भी है

सदा सुहानी सुबह तुम्हारी
पावन हो
जब भी तुम कह दो तो मौसम
सावन हो

भूली बिसरी यादों में
एक पल ख़ास तुम्हारा भी है
मेरी पूजा की थाली में
एक दीप तुम्हारा भी है

हर दिन तुमको एक नया
विश्वास मिले
जीवन में आगे बढ़ने की
प्यास मिले

जीवन के महके गुलशन में
एक फूल तुम्हारा भी है
मेरी पूजा की थाली में
एक दीप तुम्हारा भी है

-नीलम जैन

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter