अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

 

 

 

काले बादल

काले काले बादल आते
रिमझिम रिमझिम जल बरसाते
चम चम चम बिजली चमकाते
गड़ गड़ गड़ गड़ शोर मचाते
मेरे मन को बहुत लुभाते
काले काले बादल आते

— मधु अग्रवाल

बादल

नभ पर काले छाए बादल
रिमझिम वर्षा लाए बादल
अट्टहास कर कभी हमारा
देखो दिल दहलाए बादल



नन्हीं नन्हीं बूंदों से ये
धरती को सहलाए बादल
भीग रहे मस्ती में बच्चे
देख उन्हें मुस्काए बादल


—अशोक अंजुम

 

 

बादल

आसमान में काले बादल
बारिश के मतवाले बादल
रिमझिम रिमझिम बरस रहे हैं
कैसे सुंदर प्यारे बादल

— ललित कुमार

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter