अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

 


 

चंदा एक

आसमान में तारे हैं
देखो कितने सारे हैं
चंदा लेकिन फिर भी एक
एक मगर है सबसे नेक

-पूर्णिमा वर्मन

 

चन्दामामा प्यारे प्यारे

चन्दामामा प्यारे प्यारे
मुझे बहुत हो भाते।
मगर क्यों नहीं साथ हमारे,
कभी खेलने आते।

मित्र सदा ही झिलमिल तारे,
साथ तुम्हारे रहते।
मगर यहाँ आने से क्या वो,
मना तुम्हें हैं करते?

पंख पहन मैं परी बनूँगी
उड़कर आ जाऊँगी,
आसमान से मामा तुझको,
घर अपने लाऊँगी।

ढूँढेंगे फिर तुझे सितारे,
लेकिन तुम न मिलोगे।
रोएँगे वो तेरे बिन, तुम
मेरे साथ रहोगे।

-कल्पना रामानी
 

 

चाँद की दादी

चाँद की दादी आ जाना
ढेर खिलौने पा जाना

भूख लगी है अगर जोर की
दूध जलेबी खा जाना

चाँद का कुर्ता क्यों सिलती है ?
मुझको भी बतला जाना

देखो अब तो नींद आ गई
मीठी लोरी गा जाना

-मंजुल भटनागर

 

 

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter