अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

 

 

जुगनू

मुन्ने ने देखा एक जुगनू
सरपट भागा पकड़ा जुगनू
मुठ्ठी खोली पकड़ा जुगनू
चमका और बुझा वो जुगनू
ख़त्म हुई जिज्ञासा उसकी
मुठ्ठी खोली छोड़ा जुगनू
जगमग जगमग भागा जुगनू

- रजनी भार्गव

 

टिड्डा-गाना-सुना-रहा-है

मूली के पत्ते पर बैठा,
टिड्डा गाना सुना रहा है!

चाट-चाटकर ओस रसीली,
काट-काटकर पत्ती गीली!
“आओ, तुम भी करो नाश्ता,”
कहकर सबको बुला रहा है!

“मैं फूलों का रस पीती हूँ,”
यह कहकर जो उड़ी सुर्र से,
उस तितली को मुँह टेढ़ाकर,
गाते-गाते चिढ़ा रहा है!

--रावेंद्रकुमार रवि

 

मधुमक्खी

गुन गुन गुन गुम मधुमक्खी
नन्हीं बी अल्लारक्खी
जब तुम ब्याही जाओगी
हमको नहीं बुलाओगी

-अज्ञात

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter