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       आओ नटवर नागर

 
एक बार फिर और धरा पर
आओ नटवर नागर

गोकुल-वृंदावन-बरसाना
प्रेम-तृषित हैं सारे
मधुवन, तुलसीवन में राधा
बिलख तुम्हें पुकारे
मधु-वंशी की तान छेड़कर
आओ नटवर नागर

गली-गली में दुर्योधन है
चीर-हरण होता है
वचन, प्रतिज्ञा, विश्वासों का
भीष्म-मरण होता है
अबलाओं के लिए दौड़कर
आओ नटवर नागर

धरम-करम के कुरुक्षेत्र में
महायुद्ध है जारी
अप्रासंगिक धर्मराज और
कदाचार है भारी
सद्वृत्ति के सारथी बनकर
आओ नटवर नागर

एक बार फिर और धरा पर
आओ नटवर नागर

- रघुवीर शर्मा
१ सितंबर २०२६

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