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       कहो माधव

 
युग युगों के बाद मिलना हो रहा है
कहो माधव किस तरह से कट रहे हैं दिन तुम्हारे
सुध हमारी भी कभी लो, भक्त हम भी हैं तुम्हारे

बन गए योगेश्वर तुम
पर हमारे क्षेम में तत्पर तो हो न?
सुदर्शन धारा है तुमने
पर सुरीली बाँसुरी भी साथ है न
क्या अभी भी भूख है माखन सुहाता है
गोपियों का साथ भी क्या याद आता है

बरस बीते आज मिलना हो रहा है
कहो माधव, साथ में अब कौन रहते हैं तुम्हारे

सारथी अर्जुन के हो तुम
रथ हमारा भी सुपथ पर ले चलोगे क्या
प्रजापति तो हो जगत के
मगर ब्रज की प्रजा के सँग कभी होगे क्या
क्या अभी भी युद्ध में चुपचाप रहते हो
और सौ अपशब्द भी हँसकर के सहते हो

उस प्रलय के बाद मिलना हो रहा है
कहो-माधव, याद में अब कौन रहते हैं तुम्हारे

- पूर्णिमा वर्मन
१ सितंबर २०२६

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