अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

       अब तो आओ

 
अब तो आओ नाग नथैया
ज़हर भर गया यमुना जल में
विषधर खड़े हुए काढ़े फन
आँखें सूनी, गलियाँ सूनी
सूना-सूना है वृंदावन
ढूँढ़ रही है
राधा इत-उत
रंभा रहे हैं बछड़े-गैया

हुईं विषमतम स्थितियाँ हैं
दिखता कोई नहीं किनारा
हुआ अधीर और उन्मन मन
थकित हो रहा चिंतन सारा
कर न सके
आँसू की व्याख्या
ज्ञान दे रहे उद्धव भैया

- मधु प्रधान
१ सितंबर २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter