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एक कृष्ण के भाव विविध |
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श्याम सखा की लीला न्यारी,
अद्भुत है आख्यान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
दिवस अष्टमी, पक्ष अँधेरा, भाद्र-मास की रात
द्वापर युग जन्मे अनिरुद्धा, ईशमयी सौगात
अच्युत, मोहन, कृष्ण-कन्हैया, माधव के अवतार
पाप मिटाने भू का करते दुष्टों का संहार
नेक प्रयोजन लेकर जन्मे, हो जग का उत्थान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
बंदीगृह में लीला करते, खुलते गृह के द्वार
चले तात संतति को लेकर, यमुना नीर अपार
धन्य हुई गोकुल की गलियाँ, आया माखनचोर
मातु यशोदा पुलकित, हर्षित, बाबा नंद विभोर
मोर-मुकुट धर रूप अनोखा, नटखट भाव प्रधान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
बाँसुरिया की मोहक धुन पर झूम उठे सब ग्वाल
वस्त्र गोपियों का हर कर वह छिपा कुंज की डाल
रास रचें कान्हा निधिवन में राधा रानी संग
देख अँगुली पर गोवर्धन, मन में भरे उमंग
बाल-सुलभ लीला का करते आज सभी गुणगान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
सखा-रूप का भाव निराला, भरे आँख में नीर
लाज बचाने दौड़ पड़े जब सुनी द्रौपदी-पीर
विरह-अग्नि को राधा सहतीं श्याम द्वारिका धाम
प्रेम-भाव पर्याय युगों तक, प्रेम राधिका नाम
कृष्ण-प्रेम में डूबी मीरा करें इष्ट का ध्यान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
बने सारथी अर्जुन के जब बतलाया था मर्म
कर्म श्रेष्ठ मानव जीवन में, मार्ग वही सद्धर्म
चक्र सुदर्शन ले योगेश्वर करें पाप पर वार
नाश अधर्मी का करते हैं जग के पालनहार
युद्धक्षेत्र में धर्म सिखाते दे गीता का ज्ञान
एक कृष्ण में भाव विविध हैं, कैसे करूँ बखान
- अनिता सुधीर आख्या
१ सितंबर २०२६ |
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