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       कृष्ण कला हैं

 
कृष्ण कला है, कला अपारा
जाकी महिमा वेद न पारा
श्यामल तन में सृष्टि समाए
मन मोहनमय मुक्ति पाए

मोरमुकुट पीतांबरधारी
कृष्ण-कृपा ने विपदा टारी
बंसी-धुन में ब्रह्म समाया
कृष्ण-ज्ञान ने मोह नशाया

गोपी-ग्वाल सभी का प्यारा
कृष्ण कला है जग से न्यारा
मन में कृष्ण-प्रेम जो जागे
काल-कर्म सब उसके भागे

मन में मोहन द्वेष न लाए
हृदय-कमल में श्याम बसाए
कृष्ण बसाए मन में जो ही
राधा सम सुख पाए वो ही

- सुनीता सोलंकी 'मीना'
१ सितंबर २०२६

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