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कान्हा जी का जन्मोत्सव |
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कान्हा जी के जन्म के, उत्सव का
त्योहार
घर-घर में झाँकी सजी, खुशियाँ मिलीं हज़ार
गोपी दही बिलो रही, माखन निकला ढेर
झटपट कान्हा आ गए, नहीं लगाई देर
दोनों मुट्ठी भर रहे, दधि-माखन तत्काल
कुछ मुँह में, कुछ धरा पर, कुछ लग जाता गाल
फूलों का श्रृंगार है, माथे मुकुट अनूप
पाँव सुशोभित पैंजनी, सुंदर बाल स्वरूप
अधर सुनहरी बाँसुरी, मोरपंख सतरंग
अनुपम शोभा-युक्त हैं, बलदाऊ के संग
पीत वसन तन पर सजे, गल मोतिन की माल
निरख रूप हम भक्तगण, होने लगे निहाल
रेशम की डोरी लगी, देख एक पालना
मन हर्षित-प्रमुदित हुआ, रही न दुख की रेख
माखन-मिश्री भोग सब, चरणामृत के साथ
जन्म बाद हम पा रहे, प्रथम लगाकर माथ
- डॉ. मंजू लता श्रीवास्तव
१ सितंबर २०२६ |
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