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       आज है जन्माष्टमी

 
आज है जन्माष्टमी खुशियाँ मनाओ
गाँव शहरों तुम हरेक गलियाँ मनाओ

देवकी ने आज ही कान्हा जना था
राह जाये जो यशोदा तक बनाओ

लें चले वसुदेव रखकर सूप में जब
तब कहा यमुना ने पहले पद घुमाओ

तुम न वरना पार जा सकते कभी भी
इक चरण स्पर्श कान्हा का कराओ

लख यशोदा पास बालक खुश हुए थे
चल दिये ले बालिका खुशियाँ मनाओ

बालिका वह ही बनी विन्ध्वासिनी जी
भक्ति ‌ श्रद्धा शीघ्र ले माँ चरण जाओ

- विजय चन्द्र त्रिपाठी
१ सितंबर २०२६

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