अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

       कृष्ण प्रिय हैं

 
कृष्ण प्रिय हैं हर नगर हर ग्राम में
शक्ति है देखो बहुत इस नाम में

पूर्ण कर लेते मनौती मन्नतें
ध्यान सब धरते सुबह और शाम में

भूलते बिल्कुल नहीं भगवान को
याद रखते हैं सभी हर काम में

प्रिय बहुत हैं गोपियों के कृष्ण जब
हर जुबां पर नाम गोकुल धाम में

बाँसुरी की धुन सभी मन मोहती
फल बहुत है भावना निष्काम में

कष्ट हर लेता सभी हरिनाम है
है नहीं शंका किसी परिणाम में

- सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ सितंबर २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter