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       जन्मे हैं गोपाल सखे

 
हाँ जन्मे हैं गोपाल सखे
वे असुरों के हैं काल सखे

चमक रहा है उनका भैया -
सूरज के जैसा भाल सखे

अद्भुत सुंदर रूप-रंग है
मक्खन के जैसे गाल सखे

देखे बल खाती लहरों से
हैं कान्हा जी के बाल सखे

अत्याचारी दुर्योधन की
खींची जिसने खाल सखे

विपदा यदि आ जाए सहसा
बन जाते हैं वे ढाल सखे

चकाचौंध में इंसाँ घिरता
फेंका माया का जाल सखे

- अविनाश ब्यौहार
१ सितंबर २०२६

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