होली
है
!!

 

आओ खेलें आज होली



आतंक के प्रहार से सहमती है धरा भोली
प्रेम के गुलाल से आओ खेलें आज होली।

घट रही हैं आस्थाएँ
क्षीण होतीं कामनाएँ
आज धरती के नयन से
बह रहीं हैं वेदनाएँ
खो गई हँसी - ठिठोली कैसे खेलें आज होली।

स्नेह का अबीर हो
सदभाव की फुहार हो
धूप अनुराग की
फागुनी बयार हो
हो राग -रंग की रंगोली ऐसी खेलें आज होली।

गांधी आएँ, गौतम आएँ
ईसा और मोहम्मद आएँ
साधु-सन्त देव आएँ
प्रेम की गाथा सुनाएँ
विश्वास से भरी हो झोली मिलजुल खेलें आज होली।

न कोई घर वीरान हो
न संहार के निशान हों
न माँग सूनी हो कोई
अनाथ न सन्तान हो
दिशा- दिशा हो रंग-रोली ऐसी खेलें आज होली।

शशि पाधा
९ मार्च २००९

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