होली
है
!!

 

 

 

 

ब्रज की होरी
(पद)


 

 

श्याम संग राधा खेलत होरी
डारत फिरत रंग एक एक पै करन लगे बरजोरी।
ग्वाल बाल संग कृष्ण कन्हैया राधा संग ब्रज गोरी।
द्वंद्व बीच मारग में है गयो बहियाँ पकरि मरोरी।
ढोल मृदंग मजीरा बाजत गावत सब मिलि होरी।
उलसित मन ले घूमें सबही का छोरा का छोरी।
प्रेम रंग बरसै बज रज में अनुपम है ब्रज होरी।

सतीश चंद्र उपाध्याय
१७ मार्च २००८

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