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          तिलक की होली

धरती भी अंबर से बोली
हाथ में लेकर चंदन-रोली
आओ संग चलें हमजोली-
खेलें सिर्फ तिलक की होली

नदिया-ताल-तलैया सूखी
प्यासी धरती, जनता भूखी
पानी का संकट गहराता -
तापमान नित चढ़ता जाता
लें संकल्प चलें बन टोली

जलस्तर नित घटता जाए
सागर में जल बढ़ता जाए
हम भी इस पर ध्यान लगाएँ -
अब ना पानी व्यर्थ गँवाए
कैसे भी हम करें ठिठोली

गीले रंग से रंग जाने पर
कितना पानी पड़े बहाना
सोचें लें संकल्प सभी हम-
बूँद-बूँद जल हमें बचाना
सबकी खुशहाली की खातिर
अमिट प्रेम से भर दें झोली

- सुरेन्द्र कुमार शर्मा
१ मार्च २०२४
   

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