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 तुझसे ही तो मेरी होली

प्यार है मनुहार है !

पिचकारी में प्रेम रंग भर
अंजलि मध्य अबीर संग धर
फगुआ गाता अरु मदमाता
फागुन आया रंग दिखाता
छाया अजब खुमार है
प्यार है मनुहार है

पुनः अनमने हृदय जुड़ रहे
पंख लिये सुख स्वप्न उड़ रहे
घृणा बैर अवसाद बह रहे
चैती कजरी गान कह रहे
आया बड़ा करार है
प्यार है मनुहार है

यौवन पर अब हरियाली है
पकती गेहूँ की बाली है
पक्षी गाते उपवन उपवन
ऋतु अनुपम यह मतवाली है
सुगंध का अंबार है
प्यार है मनुहार है

रंगों से जब रंग मिल रहे
गालों पर नव रूप खिल रहे
जात पात का रंग धुल रहा
प्रेम रंग हर हृदय घुल रहा
विदा हुई तकरार है
प्यार है मनुहार है

- ओम प्रकाश नौटियाल
१ मार्च २०२४
   

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