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       भारतीय रंग

होली सिखलाती है जीने का ढंग
चढ़ गया ज़माने पर भारतीय रंग

भूल कर अहम् कैसे दिल हैं मिल जाते
प्यार से गले मिलकर दूरियाँ मिटाते
निर्मल मन से फिर हम रहते हैं संग
चढ़ गया ज़माने पर भारतीय रंग

भिन्न-भिन्न रंगों की छा गई छटा है
इंद्रधनुष जैसे हर घर में निकला है
हृदयों में जाग उठी फिर नई उमंग
चढ़ गया ज़माने पर भारतीय रंग

विविध व्यंजनों संग है गुझियों की धूम
भाँग छान कर भी कुछ लोग रहे झूम
हर तरफ़ मचाया है सब ने हुड़दंग
चढ़ गया ज़माने पर भारतीय रंग

- भूपेन्द्र सिंह 'होश'
१ मार्च २०२४
   

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