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चल चल सज ले

देख सखी
फागुन आया है

बुला रहा है बड़े प्यार से
चल सज ले चल चल जल्दी चल
घर का कोना कोना कर दे
उत्सव रस से छल छल छल छल

ठहर सुन ज़रा,
तू नमकीन मिज़ाजी रख ले
मुझको तो मीठा भाया है

अभी देख लायची चिरौंजी
मावा बूरा सब आएँगे
मैदे वाली किश्ती में चढ़
सब के सब नाचे गाएँगे

और कहें क्या
डोकरिया कढ़ाई में भी री!
जोश गजब का हहराया है

दो ऊँगली से घूँघट वाली
ओट बना कर झाँक रहे जो
अनगिन सकुचाते शर्माते
भाव रसीले ताक रहे जो

आज सभी पर
मन की मुट्ठी ने भर-भर कर
रंग गुलाबी बिखराया है

- सीमा अग्रवाल
१ मार्च २०२२
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