अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

फूले फूल पलाश के

नदी किनारे भोर भुरहारे
फूले फूल पलाश के

बैठ नीम की डाल
द्वार पर कोयल बोल गई
भीनी भीनी गंध हवा में
पुरवा घोल गई
कुसुम कली ने लिख भेजी है
पाती नाम जवास के

साँझ हुई तो सोनजुही फिर
झर झरती है
गालों में गुलाल आँखों में
काजल भरती है
नैनो ने कुछ नए कथानक
रचे फागुनी प्यास के

सावधान आ रही उर्वशी
आकर वाम हुई
सुनो पुरुरवा एक जिंदगी
तेरे नाम हुई
इंद्रलोक ने तोड़े बंधन
पृष्ठ रचे इतिहास के

- शिवचरण चौहान
१ मार्च २०२०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter