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 आ गया मौसम सुहाना

कोपलों ने शाख को फिर
चूमकर कुछ यों कहा
आ गया मौसम सुहाना
प्यार का इज़हार का

मस्तियों के फाग का
ऋतुराज स्वागत कर रहा है
थामकर कूची पवन की
रंग नित नव भर रहा है
भ्रमर फिर खिलती कली पर
रीझकर रचने लगा
छंद नव श्रृंगार का
मान का मनुहार का

आ गया मौसम सुहाना
प्यार का इज़हार का

पीत पुष्पों ने धरा के
गाल पर हल्दी चढ़ा दी
बाँह किरनों ने पसारी
सुनहरी चूनर उढ़ा दी
डालियों का मन हरा सा
झूमकर गाने लगा
गीत शुभ सत्कार का
नेह का अभिसार का

आ गया मौसम सुहाना
प्यार का इज़हार का

- निशा कोठारी
१ मार्च २०१९

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