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आ गई होली

आ गई होली लिए
रंगों की झोली

साँस महकी, चाल बहकी
देह में रति-दीप्ति लहकी
आम भी बौरा गए हैं
टेसुओं की आग दहकी

सुख से लहरा कर करे
सरसों ठिठोली

डोलती फिरती हवाएँ
घोलती हैं मन में महुआ
जाने किसकी धुन में पागल
हो गई है आज पछुआ

बाँटती फिरती है सब को
भंग की गोली

रंग की बदली है छाई
पुलक प्राणों में समाई
चंग लेकर संग में, सबने
बड़ी हुड़दंग मचाई

कुछ शरीफों की भी इसने
पोल है खोली

- उर्मिला उर्मि
१ मार्च २०१७

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