अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

आया नवल वसंत

आया नवल बसंत सखी री
संग अपने फाग ये लाये.

चिलमन हटा सूर्य अब झाँके
प्रकृति करे तैयारी आके
सरसों पीला रंग घोलती
टेसू रंग कलश भर लाये

कलियाँ खिल खिल कुञ्ज कुञ्ज में
कोयल कूक रही उपवन में
संगत भँवरे गुंजन देते
तितली अलबेली इतराये

बगिया रंगों की हाट सजी
सौरभ मकरंद सुगंध लिये
नव पल्लव करताल बजाते
फूलों ने मधुघट छलकाये

आओ मिल सब खेलें होली
नाचें गायें करें ठिठोली
बीती भूलें नव उमंग से
तन मन भीगे रंग लगजाये

- ज्योतिर्मयी पन्त
१ मार्च २०१७

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter