अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

होली है

 

फागुन की पहली पगचाप

आज सुनी
फागुन की पहली पगचाप !

रेशम-सी
किरणों में जादू-सी बात
हाथों में थामे मन सपनों का हाथ
नाच रहा झूम रहा
फूलों की थाप !

रातों में
मचले-से महुओं का मौन
सीधे सन्देसे ज्यों फूले सागौन
दिल के गहरावों में
यादों की भाप !

अलसाई
आँखों-सी अरुणाई झील
पर्वत से शर साधे मन्मथ का भील
काया से छूट चला
संयम का जाप !

-अश्विनी कुमार विष्णु
५ मार्च २०१२

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter