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        घट दीप

 
घट दीप का है पर्व पावन ताल सुर लय हर्ष का
झूमते गाते सभी मिल
शुभ शक्ति के उत्कर्ष का

पर्व नवरात्रि का आया भाव मन में खिलखिलाया
थिरक उठते हैं कदम जब खूब सुर में सुर मिलाया
आनंद से मिलकर मनाते
पर्व भारतवर्ष का

शक्ति का नव जागरण है हर्ष के भरपूर क्षण हैं
सौंदर्य के परिधान प्रिय सँग शोभित अलंकरण हैं
साथ आपस में निभाते
मिल विचार विमर्श का

गीत गाते नृत्य करते भाव रंगों में निखरते
क्रम युगों से चल रहा यह मन युवा भी हैं मचलते
सिलसिला आगे बढ़ा है
आपसी परामर्श का

मातु दुर्गा का आराधन नौ दिनों का पर्व पावन
संस्कृति है नृत्य गरबा नाचता गाता है जन-मन
है बसा हर एक मन में
आनंद शुभ हर वर्ष का

-सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ अक्टूबर २०२६

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