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        शीत शरद

 
शीत शरद पूनम का चंदा
सचमुच बहुत नशीला है
वासंती किरणों को पीकर
यह गाता बहुत सुरीला है

पुरवैया सँग झूमझूमकर
घूम रहा है मस्ती में
परियों से बातें करता है
वो आकाशी बस्ती में
हुई शरारत तारों से है
इसलिए चेहरा पीला है

धवल रेशमी किरणों के सँग
धरती भी है झूम रही
गरबा का उल्लास सजा है
दुनिया सारी घूम रही
देख नजारा चंदा का रंग
आज हुआ चटकीला है

- श्रीधर आचार्य 'शील'
१ अक्टूबर २०२६

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