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        अंतर्मन उल्लास भरे

 
झूम झूम कर तन-मन थिरके डाँडिया से नरक तरे
अंतर्मन उल्लास भरे

त्योहारों का मौसम कार्तिक लगा दशहरा दीवाली
रंग-बिरंगी परिधानों में युवा शक्ति मतवाली
पीढ़ियों से मना रही है दशमी और दिवाली
नवरात्र में शक्ति साधना
गरबा गौरव गान करे

शहर शहर मेला आयोजन राम लला की लीला
शीतकाल आने से पहले हो मौसम रंगीला
परंपराएँ परिभाषित हैं पालन से आनंद झरे
समाजिक समरसता पनपे
अंतर्मन उल्लासभरे

- लक्ष्मी नारायण गुप्त
१ अक्टूबर २०२६

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