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        डाँडिया रास

 
गरबे की दो डंडी ले लो
सजी हुई है मंडी ले लो

लहंगा भी है चुनरी भी
सजा चुटीला, मुंदरी भी
काजल मेरा बड़ा नशीला
देख जलेगी बदरी भी
केश उड़े उड़ जग डस आए
सस्ती है ये कंघी ले लो

आरा रारा-रारा-रा
चूमे कमर शरारा-रा
नकबेसर की लूट पड़ गई
जेब पिया की झारा-रा
हाय झुलनिया हाय टिकुलिया
जड़ी सितारा बिंदी ले लो

घूम लिया मेला जग सुंदर
झूम-झूम भर उर के अंदर
हरियर धरती प्यासी रह गई
लुभा रहा था भरा समुंदर
इस बाजार सभी कुछ मिलता
कहे न कोई संगी ले लो

- जिज्ञासा सिंह
१ अक्टूबर २०२६

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