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         शक्ति समर्थित पर्व

 
शक्ति समर्पित पर्व है, सुंदर गरबा गान
आराधन अर्चन सहित, नारी का सम्मान

तीन तालियाँ कर रहीं, हैं त्रिदेव का ध्यान
नृत्य डांडिया संग में, गरबा पूर्ण विधान

हर्ष और उल्लास सँग, विजय पर्व का मान
शक्ति अराधन नृत्य सँग, धर दुर्गा का ध्यान

विविध रूप धारे हुए, आदि शक्ति हो व्यक्त
कण -कण ऊर्जित अंब है, अद्भुत है अव्यक्त

मावस पीछे आ रही, नव रात्रि की धूम
गर्व असुर का चूर्ण कर, गरबा गरबा घूम

फुलझडियों-सी ले हँसी, आँखों में नवदीप
विविध रंग परिधान में, गरबा पर्व समीप

खुशियों के गहने गढ़े, जगदंबा के मंत्र
करें डाँडिया नृत्य सब, मनहुँ स्वचालित यंत्र

थाली -थाली दीप हैं, ताली- ताली ताल
जुड़ें डाँडिया हाथ ले, किए सिंदूरी गाल

रोली अक्षत आरती, पूजा वाले थाल
दीप जलाए नैन में, उजियारे की ढाल

नवरात्रों की रात नौ, नवजीवन की जोत
थाल थाल में दीप नव, चमकें ज्यों खद्योत

आँखों में सूरज उगे, है मुखड़े पर भोर
गरबा खेलें गोपियाँ, करे डाँडिया रोर

जगदंबा के रूप में, मिला शक्ति वरदान
गरबा खेलें भक्त जन, अधरों पर मुस्कान

रंग बिरंगे फूल ले, सजा रखी है माल
दर्प चूर्ण करता मुकुट, झिलमिल टीका लाल

शारदीय नवरात्र में, हुआ पवन अनुकूल
झरते हरसिंगार के, महके महके फूल

पवन सुगंधित हो गया, मधुर हुआ मधुमास
गरबा के उल्लास में, साँस साँस में रास

लहरे बंदनवार हैं, फहरे हैं पंडाल
थिरक रहे नवदीप ज्यों, लख उजियारे ताल

धरा गगन सब गूँजते, जयकारे के बोल
मंत्रों के संधान से, बँधे हुए हैं ढोल

सब मंगल कर मंगला, दुर्गा दुर्गति दूर
हरे रोग, आरोग्य दे, भर अंचल सिंदूर

अवनी अंबर भर रहा, मधुर मुखर उल्लास
गरबा लाये डाँडिया, और सुखद परिहास

- सोनम यादव
१ अक्टूबर २०२६

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