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        गर्मी के दिन तत्ते तत्ते 

 
गर्मी के दिन तत्ते तत्ते, स्वेद से लथपथ कपड़े लत्थे
जल बिन सारे वृक्ष तरसते, उड़ते गिरते सूखे पत्ते
आये हैं दिन अलसाये से, झुलसे और कुम्हलाये से
नहीं एक दो दिन हैं तपते
दहके पूरे पूरे हफ्ते

लू-भी-रह-रह-झुलसाती-है,-देह-शिथिल-यह-हो-जाती-है
त्वचा संक्रमण, खाज, घमौरी, छाले, दाद, सनबर्न चकत्ते
तन मन झुलसा अरु बौराया, साया ढूँढ़े काया काया
आतप किरणों की वर्षा है
अगन कुण्ड़ में जलते मत्थे

भ्रमरों का गुंजन गुन गुन गुन, तितली नर्तन सुन सुन सुन
डालों पर दहकी पवन चले टप टप मधुमक्खी के छत्ते
लस्सी नींबू नारियल नीर , ठंडे पेय करें मन अधीर
शुष्क भले हो मौसम कितना
फल पर रसमय मीठे खट्टे

- ओम प्रकाश नौटियाल
१ जून २०२६

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