अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

        गर्मी की सरकार  

 
जेठ माह जग में ले आया,
गर्मी की सरकार

चढ़ीं भृकुटियाँ क्रोधी सूरज, आग लगाए धूप
कैद हुआ जगजीवन घर में, मौसम लगे कुरूप
हुआ साँस का जीना मुश्किल
बरस रहा अंगार

तापमान उछला है ऊपर, तपता वन-इंसान
चिडियाघर में छाई उदासी, संकट में हर जान
पंखे कूलर जल है भाए
शीतल चले बयार

गर्मी से जन राहत पाने, जाएँ नदिया पास
आइसक्रीम से मिले चैन, अब कूलर आए रास
गर्म हवा लू-आँधी चलती
तपा रहा संसार

- डॉ. मंजु गुप्ता
१ जून २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter