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        धूप में होने लगा है ताब

 
धूप में होने लगा है ताब भी अब तेज
सूर्य अब होने लगा है
प्रात से ही तेज

घर में रहें आफ़त को’ कोई दे नहीं दावत
जीवन तो अपने हाथ इससे हो न अदावत
वक्‍त टल जायेगा इक दिन धैर्य जरूरी
पानी न हो कम तन में इससे ही मिले राहत
धूप के इस ताब से
करना सदा परहेज

गिर रहे हैं पात सूखे आजकल हर ओर
चल रही हरसू असहनीय लू पुरजोर
राह भरीं पात से पतझड़ ऋतु मानिंद
दूर है हर पेड़ पर नव पल्‍लवों का दौर
अब तपन अरु लाय से
बनने लगी है भेज

अब बसंती ऋतु को मिला ग्रीष्‍म का संदेश
भेजना पतझड़ सहित पातों का भी अवशेष
ना भड़क जाए अनल आए न झंझावात
अब हवा में हो रहा है लाय का प्रवेश
पात ना कोई जले
बनते यही सरखेज

- आकुल 
१ जून २०२६

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