अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

        बौराया दिनमान

 

सूरज-दीवानी हुई धूप बढ़ाकर ताप
बहा पसीना ले गया मेक'प अपने आप
.
मँहगाई के ताप से हर गृहणी बेज़ार
हाथ-पाँव ठंडे हुए गृहपति चुप लाचार
.
जन प्रतिनिधि पैदल चलें राजमार्ग पर रोज
जंगल कटने का असर क्या समझें बिन खोज
.
गरमी से हैरान है प्रतिमा बनकर दैव
ठठा निशाचर हँस कहें ऐसे रहें सदैव
.
रक्षित को लू भी लगे मादक मंद बयार
अन आरक्षित जल रहा सही न जाए मार
.
ट्रंप पुतिन जिन पिंग को सूरज ग्रह पर भेज
विश्व शांति संभावना हो पाएगी तेज
.
बंद रहे संसद भवन जमे रोज चौपाल
सांसद बैठें धूप में जन का समझें हाल
.
करते पेपर लीक जो उचित सजा है एक
सुबह-शाम तक मुफ्त में सहें धूप की सेक
.
आम आम का पन्हा पी करता गरमी शांत
खास बोतलें थामकर रहते सदा अशांत

- संजीव वर्मा सलिल
१ जुलाई २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter