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        गर्मी के दिन आए

 

आम आमरस बन गया बौर बन गए आम
मीठी मीठी दुपहरी कुछ पल का आराम

झुलसी वसुधा ताप से भानु लगाए आग!
तापमान ऐसा बढ़ा रात बिताएँ जाग!

शीतल छाया- जल मिले मन में यह अभिराम
वन प्रदेश काटे गए कहीं नहीं आराम!

धारा बन शीतल नदी बुला रही है पास
शैल पर्यटक से भरे भीड़ मिटा दे आस

हर गर्मी की छुट्टियाँ धाम बने मैदान
देख तमाशा रोज़ ही माँ रहती हैरान!

नीम डाल कोयल छिपी गाती विकलित राग
गीत पुकारें साजना भेज मधुर अनुराग

अमलतास चंपा खिले झूम रहा कचनार
पारिजात मधुमालती गुलमोहर रतनार

ग्रीष्म ऋतु पछुआ हवा लू ने किया निढाल
बरसो शीतल सलिल अब जीव हुए बेहाल

- पूजा अनिल भारवानी
१ जुलाई २०२६

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