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        गर्मियों का जोर  

 
गर्मियों का जोर बढ़ता जा रहा
स्वेद तन से खूब बहता जा रहा

भोर की कुछ धूप मद्धम देखिए
एक सुन्दर फूल खिलता जा रहा

स्तर घटा जल स्रोत का है हर जगह
तीव्रता से अब न बहता जा रहा

खूब पीते पेय शीतल लोग जब
नित्य है बाजार सजता जा रहा

फ्रिज घड़े पर पड़ रहे भारी बहुत
बर्फ भी अब खूब जमता जा रहा

कुछ घड़े अपनी जगह पर आ गए
जब समय करवट बदलता जा रहा

जेठ का अपना बढ़ा वर्चस्व है
शीश पर है ताज सजता जा रहा

- सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ जुलाई २०२६

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