अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

        गर्मी के मौसम में

 

मिले कैसे भला राहत यहाँ गर्मी के मौसम में
तपे जाते हैं धरती आसमाँ गर्मी के मौसम में

जनावर और पशु,पक्षी, मनुज व्याकुल हैं सारे ही
निकलती जाए है जैसे कि जाँ गर्मी के मौसम में

सताती थी कभी जो धुंध की दीवार पर चढ़कर
न जाने छुप गई ठंडक कहाँ गर्मी के मौसम में

बड़ा खुश हो रहा इंसान ईंटों के उगा जंगल
नज़र आते न पेड़ों के निशां गर्मी के मौसम में

मजूरी करने मुफ़लिस को निकलना पड़ता है घर से
है सर्दी में बयां ये ही बयां गर्मी के मौसम में

बुलाओ बादलों को रोष सूरज का तनिक कम हो
फुहारों! आ सुनाओ दास्तां गर्मी के मौसम में

- परमजीत कौर 'रीत'
१ जुलाई २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter