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        छुलछुलाती धूप

 

बादलों की बोरियों से
तुलतुलाती धूप
राह गलियों खोरियों में
छुलछुलाती धूप

झील झरने नद सरों को
स्वर्ण किरणें ढक रहीं
फूल का केसर उठाकर
पत्तियों पर रख रहीं
द्वार पर लड़की ठिठक कर
खिलखिलाती धूप

सेम, परबल, बर्बटी पर
तितलियों सी झूलती
धूप दिन भर बाग वन में
गुलमुहर-सी फूलती
आँवले, अमरूद ऊपर
तिलमिलाती धूप

साँझ सरकी साँप बनकर
रेत वन चट्टान से
पेट सेकर लौट आई
खेत औ' खलिहान से
घोंसलों में सिमट बैठी
कुलबुलाती धूप

- रामकिशोर दाहिया
१ मई २०२१

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