अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

      ग्रीष्म ऋतु-कुछ चित्र

 

गर्मी के दिन आए

छा गया बौर तरु वन वन, कुसुमरज सुवासित उपवन
तितली का रुचिर पुष्प नर्तन भ्रमरों की सुन गुन-गुन-गुन
पिक की अनुपम स्वरलहरी
अंतस तक थिरकाए

रात सहम कर सिकुड़ गई भानु का जो देखा ताव
सुरसा के आनन तुल्य बढ़ा प्रभु मार्तण्ड का फैलाव
भवनों पर रंग पोतता
श्रमिक स्वेद बहाए

छत पर भरी दुपहरी में ईंट चढाती मजदूरन
सूरज के तीखे तेवर को धता बताती मजदूरन
बच्चा सोता नीम तले
रो रो कर रह जाए

रेत उड़ रही मरुथल में अग्नि कणों सद्दश चमके
नागफनी के झुरमुट पर भी रेतीली वर्षा बरसे
बालू के स्तूप अनेकों
हवा संग बह जाएँ

ग्रीष्म ऋतु रहे शुष्क भले किंतु रसीले फल देती
जामुन खरबूजे तरबूजे आम बिही खीरे सेती
ककडी पपीता नारियल
गदरा कर पक जाएँ

-ओम प्रकाश नौटियाल 
१ मई २०२१

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter