हमें हँसना है, नहीं रोना है

 

 
अपना दुश्मन बड़ा ही शातिर
जिसका नाम कोरोना है

हमें ढूँढता फिरता है वो
भरना चाहे बाहों में वो
घर में छुप कर हम हैं बैठे
चकमा उसको देना है
अपना दुश्मन बड़ा ही शातिर
जिसका नाम कोरोना है

चुपके से वो आता है
मौत के मुँह ले जाता है
चक्रव्यूह अब रचा है हमने
फँस के उसे मर जाना है
अपना दुश्मन बड़ा ही शातिर
जिसका नाम कोरोना है

पीएम बोले घर में रहना
विकट युद्ध है पर मत डरना
रावण सा वो द्वार खड़ा है
रेखा पार न करना है
अपना दुश्मन बड़ा ही शातिर
जिसका नाम कोरोना है

- मीनू खरे

१ जून २०२०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter