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        चैत माह है आया

 
अमराई में कोयलिया चैती गीत सुनाती
महुआ घटवारिन सुगंध घट
माथे पर ले आती

सम्वत्सर की डलिया में गेंदा अड़हुल मुस्काये
जन्मदिवस यों मना सृष्टि का मंगल दीप सजाए
फागुन के दिन गए देखकर
धरती भी गरमाती

हर घर में गुंजित होता है रघुनन्दन का सोहर
ध्वज नारंगी लहराया लेकर हनुमत की मोहर
ठंडाई की बोतल में होली
भी है हरसाती

खेतों में तैयार खड़ी सरसों की पकती डाली
सूरजमुखी बीज ने अब जायद फसलें पा ली
चैती छठ में परवैतिन सूरज को
घर में लाती

नीमों की फुनगी पर कोमल पात पुनः अँखुआये
त्वचा रोग से मुक्त करे जो चबा चबा कर खाये
देख उदर में कोलाहल रोटी-
बासी हट जाती

- ऋता शेखर 'मधु'
१ अप्रैल २०२६

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