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        चैत्र के दिन

 

ओस भीगी गुलमुहर की छिटकियों के दिन
चैत्र डूबी रंग वाली पत्तियों
के दिन
1
कुछ बड़ी कविताएँ सूरज लिख रहा है
पढ़ रहा उनको उजाला दिख रहा है
एक तितली फिर उड़ानों में मगन है
और उपवन चुप, खयालों में गगन है
1
गुनगुनी-सी धूप वाली खिड़कियों के दिन
चैत्र झरती नीम वाली
सुस्तियों के दिन
1
भोर--की--बेला--रसीली--कोयलें--गातीं
मंजरी की गंध लेकर टोलियाँ आतीं
दिशाओं मलय-वन की गजल निखरी
' किरन पर इक सुनहरी लहर बिखरी
1
अमलतासों में बसंती झुमकियों के दिन
चैत्र दहते टेसुओं की
चिट्ठियों के दिन
1
- पूर्णिमा वर्मन
१ अप्रैल २०२६

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