हमको बुलाया चाय पर

 
आपने हमको बुलाया चाय पर
लम्हा जैसे थम गया था चाय पर

छोड़िये मुद्दे सियासी जो भी है
इश्क हो मुद्दा हमारा चाय पर

कीमती प्याली में चाहे पानी हो
साथ हमको देखे दुनिया चाय पर

दावतें दी है रकीबों को मगर
हमको तो जब भी बुलाया चाय पर

चाय के स्टॉल पर हम-तुम मिले
इश्क़ का चर्चा चला था चाय पर

- नितिन जैन
१ जुलाई २०२०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter