अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर


         मेघ पालकी

 
 
मेघ-पालकी उतरी आँगन
बूँदन सेज सजाओ सावन

नभ से गिरते मोती मनके
झाँके बिजुरी रह रह छन के
बरसो मेघा थोड़ा थमके
लाजो दुल्हन थर थर काँपे
द्वार धुले हल्दी के छापे
भारी पलकें, फैला आँजन
बूँदन सेज सजाओ सावन

ढोल ढमाढम व्योम बजाए
बिजुरी-पायल नृत्य दिखाए
रंगें रूह को धनक लुभाए
नदियाँ पोखर झरने खनकें
सारे पथ फूलों से गमकें
मधु बौछार पड़े मनभावन
बूँदन सेज सजाओ सावन

- त्रिलोचना कौर 'तनु'
१ अगस्त २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter